
महकने दो के बच्चे आख़िर महकने लगे
आज विशाल संकल्प संस्था,के माध्यम से शिक्षा हासिल कर रहे,पाँच बच्चों ने, यू0पी0 बोर्ड के बच्चों ने शानदार जीत हासिल की। इन बच्चों को उज्जवल

आज विशाल संकल्प संस्था,के माध्यम से शिक्षा हासिल कर रहे,पाँच बच्चों ने, यू0पी0 बोर्ड के बच्चों ने शानदार जीत हासिल की। इन बच्चों को उज्जवल

कहते हैं किताबें इन्सानों की सबसे अच्छी दोस्त होती हैं. जैसे व्यक्ति अपने दोस्त का हर पल, हर घड़ी, हर मुश्किल में साथ देते हैं,

किसी भी फूल को कोई महक नही दे सकता है,अगर हम कुछ दे सकते है तो सिर्फ खाद पानी,फूल तो खुद ही कहता है कि

उपयोग करने पर निर्भर करता है। सोशल मीडिया किसके लिये क्या है? तस्वीर में मेरे साथ जिसकी फोटो आ नही देख पा रहे है कुछ

आज मैं फूलों की खेती कर रहीं हूँ।कल जब मेरे ये फूल महकेंगे तो किसी को ख़बर हो ना हो दो को जरूर होगी।एक जिसको

शिक्षा,एक दिन का काम नही,एक सतत प्रक्रिया है।शिक्षा के परिणाम,स्थायी होतेहै।लेकिन,उसी पेड़ की तरह इसकी जड़ो पर काम करना होता है,जो बीज से वटवृक्ष बना।विशाल

कल विशाल संकल्प की महकने दो की क्लास में,डिज़ाइन स्क्वायर के बच्चों ने शिरकत की। ये बच्चें फैशन डिज़ाइनर बनने की राह पर है। मेरे

बहुत कम लोग सर्वोदय दिवस के बारे में जानते होंगे। भारत मे शहीद दिवस के रूप में कुछ दिन निश्चित है। 30 जनवरी और 23

राष्ट्रीय बालिका दिवस पर,विशाल संकल्प संस्था व अस्तित्व भारत ने माघ मेला,संगम नोज़ से बेटियों पर संगम संवाद व कला प्रदर्शनी महकने दो,का आयोजन किया।